कैसे एक Bengaluru टेक प्रोफेशनल ने AI से 2 महीनों में 7 इंटरव्यू पाए

मध्ये प्रतियोगिता के इस युग में, नौकरी के लिए कोशिश करना उतना ही जरूरी है जितना स्मार्ट तरीक़े से कोशिश करना। बेंगलुरु के एक टेक प्रोफेशनल ने यही किया — AI को सिर्फ इंस्ट्रूमेंट नहीं, बल्कि रणनीति बनाया।

अमर सौरभ (पूर्व मेटा एवं टिकटॉक में काम कर चुके) ने अप्रैल 2025 में नया जॉब सर्च शुरू किया था, लेकिन दो महीनों में सिर्फ 2-3 इंटरव्यू कॉल्स मील पाए।

फिर उन्होंने तय किया—असाधारण तरीका अपनाना होगा। उन्होंने ChatGPT की “custom GPT” सुविधा का प्रयोग कर “PM Job Search Advisor” नामक GPT बनाया। इसमें उन्होंने अपना रिज़्यूमे, लिंक्डइन प्रोफाइल और प्रोजेक्ट विवरण अपलोड किया, और लक्ष्य सेट किए कि वह वरिष्ठ प्रोडक्ट मैनेजर रोल्स के लिए आवेदन करेंगे।

इस GPT ने क्या किया

हर नौकरी विवरण के हिसाब से रिज़्यूमे को अनुकूलित किया।
Recruiter को भेजने के लिए व्यक्तिगत संदेश तैयार किया।
इंटरव्यू की तैयारी में मदद की — प्रोजेक्ट को कैसे प्रदर्शित करें, सवाल-जवाब की झलक।
जब ऑफर आया, तो सैलेरी वार्ता में भी सहायता मिली।

परिणाम

दो महीनों में उन्होंने 7 इंटरव्यू हासिल किए, जिसमें एक प्रमुख कंपनी ‎PayPal में उन्होंने नौकरी स्वीकार की। ([The Economic Times][2])

क्यों है यह महत्वपूर्ण

टेक्नोलॉजी + इंसानी टच: उन्होंने काम को नहीं छोड़, उसे त्वरित बनाया।
व्यक्तिगतता बनी पहचान: सामान्य आवेदन लुप्त हो रहे थे; यह आवेदन अलग दिखे।
AI के साथ नियंत्रण: उन्होंने AI को निर्देशित किया, उसे छोड़ नहीं दिया।
भविष्य की तैयारी: अब सिर्फ क्या आप जानते हैं नहीं, बल्कि कैसे दिखाते हैं भी मायने रखेगा।

आप क्या कर सकते हैं

अपने रिज़्यूमे को समीक्षा करें: 3-5 ऐसे प्रमुख प्रोजेक्ट चुनें जो लक्ष्य जॉब से मेल खाते हों।
एक प्रक्रिया बनाएं: AI से कवर-लेटर बनाएं, लेकिन समीक्षा खुद करें।
मानवीय हिस्से को जिंदा रखें: तथ्य सही रखें, अपना स्वर बनाए रखें।
फॉलो-अप करें: AI से ट्रैकिंग, रीमाइंडर सेट करें, तैयारी करें।

मुख्य बातें

AI चमत्कार नहीं, लेकिन रणनीति के साथ खेल बदल सकता है.
मात्रा से ज्यादा प्रभाव मायने रखता है।
काम फिर भी करना होगा—AI मददगार है, लेकिन काम आपका है।
अगले दौर में नौकरी खोज सिर्फ डेटा नहीं, प्रस्तुति होगी।

FAQ

Q1. क्या सिर्फ सामान्य ChatGPT से ऐसा संभव है?
हाँ संभव है, लेकिन अमर ने पाया कि सामान्य ChatGPT अक्सर त्रुटियाँ करता था, कम लक्ष्य-संचालित था। कस्टम GPT ने बेहतर काम किया।

Q2. इस GPT सेट-अप में कितना समय लगा?
लगभग 1.5-2 घंटे में उन्होंने इसे तैयार किया।

Q3. क्या उन्होंने बहुत ज्यादा आवेदन किये?
नहीं। आवेदन संख्या लगभग समान रही, लेकिन प्रतिक्रिया दर बढ़ी।

Q4. क्या AI टूल्स इंसानी मेहनत को ख़त्म कर देंगे?
नहीं। AI मदद करता है optimisation में; नेटवर्किंग, संवाद, प्रदर्शन आपका ही रहेगा।

Q5. क्या यह रणनीति सिर्फ वरिष्ठ टेक रोल्स के लिए है?
नहीं। मूल सिद्धांत—अनुकूलन, स्मार्ट काम, व्यक्तिगतता—किसी स्तर पर लागू हो सकते हैं।

3 thoughts on “कैसे एक Bengaluru टेक प्रोफेशनल ने AI से 2 महीनों में 7 इंटरव्यू पाए”

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