दिवाली कारों की बहार: बैंकक्रप्ट हुई दुकान से 51 लग्ज़री कारें बाँटने तक की कहानी

कुछ कहानियाँ बैठक-कक्ष से नहीं, मोर्चों से शुरू होती हैं — जवाब-देही की लालसाओं से, गलती-भरी रातों से, और पुनर्प्राप्ति की ठान से। एम. के. भाटिया की कहानी वैसी ही है।

एक समय उनका मेडिकल-शॉप व्यवसाय घाटे में चला गया। दिवालिया घोषित। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2015 के आसपास उन्होंने MITS ग्रुप की नींव रखी। आज 12 कंपनियों का नेटवर्क है।

और इस दिवाली, उन्होंने एक सनसनीख़ेज कार्यक्रम में 51 लग्ज़री कारें अपनी टीम को उपहार में दीं।

यह उपहार इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

लगातार संघर्ष से सफ़लता: एक समय दिवालिया हो चुके व्यक्ति ने कॉर्पोरेट जगत में मुकाम बनाया।
टीम को शक्ति देना: “यह कर्मचारी नहीं, मेरे जीवन की फिल्म के हीरो हैं,” भाटिया ने कहा।
साझेदारी की भावना: सफल कंपनियाँ कभी अकेले नहीं बनतीं — उनका आधार टीम, विश्वास और साझा विजन होता है।
ब्रांड-विज्ञापन से परे: यह कारें सिर्फ गिफ्ट नहीं, कंपनी की संस्कृति और विश्वसनीयता की झलक हैं।

उद्योगपति और टीम के लिए सबक

निचले मोड़ को अंतिम समझिए मत — वहाँ से शुरुआत होती है।
पहचान और पुरस्कार सिर्फ भव्य नहीं — वे प्रेरणा देते हैं।
संस्कृति निवेश है — जो मापा नहीं जा सकता, लेकिन महसूस किया जाता है।
बड़े सोचना ठीक है, लेकिन शुरुआत छोटे कामों से होती है।
कहानी सभी को जोड़ती है — उस डेटा से कहीं अधिक जिसकी हम रिपोर्ट करते हैं।

एम. के. भाटिया ने इस दिवाली 51 लग्ज़री कारें दीं — यह उनका “हाफ-सेंचुरी” इशारा है।
पूर्व दिवालिया से अब 12 कंपनियों का मालिक — एक आश्चर्य जनक सफ़र।
यह सिर्फ ख़रीद-फरोख़्त नहीं — यह उनकी दृष्टि का प्रतीक है: टीम-सशक्तिकरण, मान-त्याग और सामूहिक सफलता।
कारोबार हो या करियर — यह कहानी याद दिलाती है कि कैसे आप चलते हैं, उससे ज़्यादा क्यों आप चलते हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top